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Karva Chauth is celebrated on the fourth day that follows the full moon in the Kartik month of the Hindu calendar by Hindu women in Northern India, in which married women fast from sunrise to moonrise for the safety and longevity of their husbands.

Karva Chauth - Sunday, October 8, 2017
Ahoi Ashtami - Thursday, October 12, 2017
Diwali - Thursday, October 19, 2017

Aartis

Aarti is a Hindu religious ritual of worship, a part of puja, is an offering of respect to the Supreme Lord. During the puja light from wicks soaked in ghee (purified butter) or camphor is offered to one or more deities.

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Kathas

Katha is an Indian style of religious storytelling, a narration or recital of that which has occurred in the past; a history; a record, and often involve professional storytellers called kathavahchak.

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Bhajans

A bhajan or kirtan is a Hindu devotional Song. Music to human ears is heavenly. And if it's purely devotional, it's truly divine. Such a genre of music is the Bhajan. Bhajans are deeply rooted in the Indian tradition. Bhajans are simple songs in soulful language expressing the many-splendor emotions of love for God. Satsang means pooja in good company along with saints.

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Chalisas

Chalisa means "forty verse" prayers . Verses that praise and plead with devotion. They are recited over and over again or chanted by groups.  The acts and deeds of deities are recalled in these verses to aid the devotee to meditate on righteous and noble qualities.

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Mantras

A Vedic hymn; word or sound repeated to aid concentration in meditation. It is a tool that and frees the mind from its attachment and preoccupation. By repeating the same word or phrase over and over again mantras help a person focus inward in a spiritual way.

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श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं,
नवकंज लोचन, कंजमुख कर, कंज पद कंजारुणं.

कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम,
पट पीत मानहु तडित रूचि-शुची नौमी, जनक सुतावरं.

भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंष निकन्दनं,
रघुनंद आनंद कंद कोशल चन्द्र दशरथ नंदनम.

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभुशनम,
आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम-जित-खर दूषणं.

इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि-मन-रंजनं,
मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल-गंजनं.

एही भांति गोरी असीस सुनी सिय सहित हिं हरषीं अली,
तुलसी भावानिः पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली.

जानी गौरी अनूकोल, सिया हिय हिं हरषीं अली,
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे.


बोल सीता राम दरबार की जय.
बोल सिया वर राम चन्द्र की जय.
पवन सुत हनुमान की जय.
पायो जी मैने राम रतन धन पायो
वस्तु अमौलिक दी मेरे सतगुरु, किरपा करि अपनायो
पायो जी मैने…

जनम जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो
पायो जी मैने…

खर्च ना खूटे वाको चोर ना लूटे, दिन दिन बढ़त सवायो
पायो जी मैने…

सत की नांव, खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो
पायो जी मैने…

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख हरख जस गायो
पायो जी मैने राम रतन धन पायो


ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली, हरी गुण गाने लगी॥
महलों में पली, बन के जोगन चली।
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥

कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं,
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी।
बैठी संतो के संग, रंगी मोहन के रंग,
मीरा प्रेमी प्रीतम को मनाने लगी।
वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी॥

ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो

जिसका न कोई संगी साथी ईश्वर है रखवाला
जो निर्धन है जो निर्बल है वह है प्रभू का प्यारा
प्यार के मोती लुटाते चलो, प्रेम की गंगा...

आशा टूटी ममता रूठी छूट गया है किनारा
बंद करो मत द्वार दया का दे दो कुछ तो सहारा
दीप दया का जलाते चलो, प्रेम की गंगा...

छाई है छाओं और अंधेरा भटक गई हैं दिशाएं
मानव बन बैठा है दानव किसको व्यथा सुनाएं
धरती को स्वर्ग बनाते चलो, प्रेम की गंगा...

ज्योत से ज्योत जगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी सब को गले से लगाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो ...

कौन है ऊँचा कौन है नीचा सब में वो ही समाया
भेद भाव के झूठे भरम में ये मानव भरमाया
धर्म ध्वजा फहराते चलो, प्रेम की गंगा ...

सारे जग के कण कण में है दिव्य अमर इक आत्मा
एक ब्रह्म है एक सत्य है एक ही है परमात्मा
प्राणों से प्राण मिलाते चलो, प्रेम की गंगा ...

The practice of chanting the Hare Krishna mantra is recommended in the Puranas and throughout Vaishnava literature.


  • त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
  • त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव ॥


  • ॐ असतो मा सद्गमय ।
  • तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
  • मृत्योर्मा अमृतं गमय ।
  • ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥


  • ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः
  • धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात ॥


  • ॐ त्रियम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं
  • उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मोक्षिय मामृतात् ॥


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India is a land of great diversity. It described as a land of many Devotionals and innumerable languages, it might well be described as a land of festivals as well. Indians love celebrating every little occasion from the harvesting of crops, welcoming the spring or rain, to seeing the full moon lends itself to joyous celebrations splashed with colors, music, folk dances and songs. Even the birthdays of divine beings are celebrated by connecting them with particular festivals. Here's a list of common religious and national festivals celebrated all over India. .

Shri Shani Chalisa - श्री शनि चालीसा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥1॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
पिंगल, कृष्ो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥
सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥2॥

पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥3॥

रावण की गतिमति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवाय तोरी॥4॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजीमीन कूद गई पानी॥5॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥6॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देवलखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
वाहन प्रभु के सात सजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
जम्बुक सिंह आदि नख धारी।सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥7॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥8॥

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥9॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥10॥

॥दोहा॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों भक्त तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

India is the home of the world's oldest civilizations. It is traditionally a land of spirituality and faith. India is a secular state in which religion plays a major role in the daily life. Rituals, worship, and other religious activities are very prominent in an individual's daily life. Prayer or worship (Sanskrit : Prarthana) is considered to be an integral part of the Hindu religion. Some of the popular forms of prayers are mantras, shlokas, aartis, chalisas, bhajans, and chanting of god names. The main motive of Prayer or worship for the Hindu worshipper is making a spiritual connection with the divine; expressing one's love and devotion towards god; obtaining their blessings; and seeking wishes for the fulfillment of one's desires.

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